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एक पत्र भारतवासियों के नाम

प्रिय भारतवासी,

अभिवादन!

आपकी काबिलियत, आपकी समझ और आपके देश प्रेम पे किसी भी तरह का कोई संदेह नहीं परंतु देश में चुनावी मौसम के आने से फिज़ाओ का रुख कुछ यूँ बदलता नज़र आ रहा है कि इसमे आपका धैर्य खोना स्वाभाविक है

बीते दिनों में पुलवामा हमले के बाद आपने ना सिर्फ़ जवानों की शाहादत का राजनीतिकरण होते हुए देखा बल्कि स्वयम सेना अध्यक्ष को नेताओं द्वारा सवालों के कटघरे में खड़ा कर दोषी करार करते हुए देखा है बहुत ‘सी सच्ची बातों को झूठलाया  गया है तो झूठ को सच और एक आतंकवादी को “जी” की उपाधि भी दी गयी है

“माननीय मोदी जी और उनकी पार्टी बीजेपी ने अपने कार्यकाल में सभी दायित्वों की पूर्ति सफलतापूर्वक की है” ऐसा कहना पूर्ण रूप से उचित ना होगा परंतु समय को देखा जाए तो पाँच वर्ष में 11वें से 6वीं सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था भारत का बनाना एक बड़ा कीर्तिमान है हालही में EPFO ने रिपोर्ट निकाली  “EPFO Payroll Job Data”  जिसके मुताबिक पिछले 17 महीनों में 76.48 लाख लोगों को नौकरी मिली उज्ज्वला योजना के तहत 5 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ़्त में गैस कनैक्शन वितरित किया जा चुका है मोदी सरकार ने जन –धन योजना के तहत 1,80,96,130 बैंक खाते खोलकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया आज विदेशों में भारत की ना सिर्फ़ सकारात्मक रूप से चर्चा होती है बल्कि एक इस्लामिक देश में भारतीय तिरंगे को वहाँ की सबसे ऊँची इमारत पे दर्शाकर सम्मानित किया गया (भुर्ज खलीफ़ा)

बात अगर किसानों की करें तो मोदी सरकार ने कोई बड़ी उपलब्धि नहीं हासिल की है किसानों के नाम पर 2000/- की मंज़ूरी भले दे दी हो पर आज भी किसान कर्ज़ के भार से घुट –घुट कर मर रहा है आज भी देश में शायद लाखों या शायद करोड़ों नागरिक भूखे सो रहें हैं   और ना जाने कितनी और समस्याए यूही की यूही पड़ी हैं

पर फिर भी आने वाले समय में अनेकों नाटकीय कार्यक्रम पे आकर्षित होने के स्थान पे निम्नलिखित प्रश्नों पे विचार कर आफ्ना भविष्य चुनिएगा

  • क्या 5 और 55 की कोई तुलना है ?
  • क्या विदेशों में भारतीय नागरिकों के साथ दुर्व्यवार की घटनाओं में कमी आई ?
  • क्या राष्ट्रिय पुरस्कारों के वितरण में आज भी नेता और अभिनेता है ?
  • क्या सच में कोई भी सकारात्मक बदलाव नहीं हुआ ?
  • क्या देश और देश की सेना का सशक्तिकरण नहीं हुआ ?

 

साक्षी मिश्रा

एक आम ख़याल

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