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जानिये हँसी के पर्यायवाची राजू श्रीवास्तव को

सबके चेहरे मुस्कान को लाने वाले गजोधर राजू श्रीवास्तव स्टैंड अप कामेडी के सरताज 41 दिन के बाद जिंदगी से जंग हार सभी को अलविदा कर चले गए। कोई भी नही सकता कि हँसाने वाला रुला के चला जाएगा।
राजेन्द्र रावत

राजू श्रीवास्तव का जन्म कानपुर के बाबूपुरा कस्बे में पिता रमेशचंद्र और माता सरस्वती श्रीवास्तव के घर 25 दिसंबर वर्ष 1963 में हुआ। उनका वास्तविक नाम सत्यप्रकाश श्रीवास्तव था। उनके पिता सरकारी कर्मचारी थे और कवि भी थे।

जब कक्षा 8 में थे तो उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म दीवार देखी और उनसे बहुत प्रभावित हुए और उनकी मिमिक्री करने लगे। एक बार उनके किसी मित्र ने कहा कि वो मुंबई मे क्यों नही किस्मत आजमाते। बस फिर क्या था वो मुंबई आ गए। इससे पहले वो अपने भाई की शादी मे भाभी की रिश्तेदार शिखा को दिल दे चुके थे।

मुंबई में शुरुआती संघर्ष दौर में वो एक कव्वाल शंकर शंभू के साथ रहे। कुछ समय उन्होंने ऑटो रिक्शा भी चलाया। परंतु उनकी प्रतिभा को अवसर नही मिला और उस दौर में अभिनेता खुद कामेडी करने लगे थे। उस समय जानी लीवर ने उनकी मदद की थी जिसके चलते उन्हे तेजाब फिल्म में एक छोटा सा रोल मिला तो सही पर बात बनी नहीं।

एक बार अनुराधा पौडवाल के कार्यक्रम उन्होंने अपनी प्रस्तुति दी तो टी सीरीज प्रमुख गुलशन कुमार ने उन्हे बुलाया और कहा जो अभी आपने 5 मिनट हसाया है उसे आधा घंटे तक कर सकते हो हमे कैसेट के लिए रिकॉर्डिंग करनी है राजू ने हाँ कह दी। इसप्रकार उनकी पहली ऑडियो कैसेट ‘हँसना मना हैं’ ने उन्हे घर घर तक पहुँचा दिया। अब उन्हें फिल्मो और मंच पर लगातार काम मिलता रहा, उन्होंने कल्याण जी आनंद जी, बप्पी लेहरी और नितिन मुकेश के साथ भारत ही नहीं विदेशों में भी के स्टेज शो किये। इसी बीच उन्होंने शिखा से विवाह कर लिया।

राजू श्रीवास्तव

दूरदर्शन पर प्रसारित शो टी टाइम मे उनके काम को काफी सराहा गया। उसके बाद वो शक्तिमान धारवाहिक में नज़र आये और फिल्मों मे भी काम करते रहे। परंतु ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज उनके लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ और वो कॉमेडी सुपरस्टार बन गए। भले ग्रेट लाफ्टर में सेकंड रहे पर राजू श्रीवास्तव के गजोधर के किरदार से वो मानो छा गए।

उनकी आम जन मानस की रोज बोल चाल में अपने अलग स्टाइल को लोगो ने ख़ूब पसन्द किया। चीजों का अपने अंदाज में मानवीयकरण सजीविकारण इस प्रकार से करते थे कि दर्शकों का हँसी को रोक पाना एक ग्रेट चैलेंज हो जाता था।

बिग बॉस सीजन 3 में राजू ने 2 महीने तक अपने जोक से गुद गुदाया यही नही नच बलिए सीजन 6 में पत्नी शिखा के साथ कामेडी किंग से डांसर के रूप में सभी को अचंभित किया। वर्ष 2013 में कामेडी का मुकाबला में एक बार फिर दर्शकों को लोट पोट किया। कुछ समय वो कपिल शर्मा शो के हिस्सा भी बने। उन्होंने राजनीति में भी हाथ आजमाया परंतु समाजवादी पार्टी से टिकट मिलने पर भी चुनाव नही लड़ा और 19 मार्च 2014 को बीजेपी में शामिल हो गए। प्रधान मंत्री मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान उन्हे नामित भी किया।

उनका गजोधर किरदार काल्पनिक नहीं वास्तविक था वो उनके ननिहाल में एक नाई था जिससे वो बाल कटवाते थे।

उन्होंने तेजाब, मैंने प्यार किया, बाजीगर, मिस्टर आजाद, अभय, आमदनी अठन्नी खर्चा रुप्प्या, वाह तेरा क्या कहना, मैं प्रेम की दिवानी, बॉम्बे टू गोवा, भावनाओं को समझो, बारूद- द फायर, फ़िरंगी और टॉयलेट एक प्रेम कथा आदि फ़िल्मों में भी काम किया। उनकी बेटी अंतरा वोदका डायरीज की सह निर्माता रह चुकी हैं और बेटा आयुष्मान अभी पढ़ रहा है।

हँसी के पर्यायवाची ठाहकों के वैज्ञानिक गजोधर भैया राजू श्रीवास्तव 21 सितंबर अपनी अमिट छाप छोड़ दुनिया को छोड़ कर चले गए।

नेता क्या अभिनेता सभी ने उनके इस तरह विदा होने पर अपनी संवेदना व्यक्त की जबकि उनके आईडियल रहे अमिताभ बच्चन ने अपना ऑडियो संदेश राजू को भेजा कि बहुत हो चुका अब उठो और काम पर चलो परंतु होनी को कुछ और मंजूर था राजू श्रीवास्तव अपना एक रिक्त स्थान छोड़ कर चले गए जो शायद ही भर पाए।

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